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हस्तशिल्प में लाहौल के उत्पादों की गुणवत्ता है विश्वस्तरीय, प्राकृतिक रंगों के प्रयोग से मिलेंगे ऊंचे दाम

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केलांग। स्नो-फ़ेस्टिवल में जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति हैंडलूम उत्पाद मूल्यवर्धन पर ज़िला प्रशासन व उद्योग विभाग द्वारा द्विदिवसीय कार्यशाला का समापन हुआ, जिसमें लाहौल घाटी के महिला मंडल व स्वंय सहायता समूह की 150 महिलाओं ने भाग लिया।इस कार्यशाला में  उपायुक्त पंकज राय बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए।
उन्होंने अपने सम्बोधन में हस्तशिल्प को पुरातन संस्कृति की पहचान बताया। कार्यशाला के आयोजन को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने महाप्रबंधक ज़िला उद्योग केन्द्र को निर्देश दिए  कि हम यहां से कुछ लोगों को मंडी भेजकर मास्टर ट्रेनर तैयार करेंगे ताकि वे यहां पर हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले कर आएं। इनको शिल्पगुरु ओम प्रकाश मल्होत्रा द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। ताकि आने वाले समय में यहां के उत्पाद की ब्रांडिंग हो और पर्यटक इसे स्मृति-चिन्ह के रूप में  खरीद कर ले जाएं।

घाटी में पर्यटकों की आमद बढ़ रही है

कार्यशाला में राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित,  शिल्पगुरु ओम प्रकाश मल्होत्रा ने हैंडलूम उत्पाद के मूल्यवर्धन के लिये लोगो को महत्व पूर्ण जानकारी दी। उन्होंने प्राकृतिक रंगों को बनाने व उससे कपड़ों को डाई करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी मटर, छरमा, गोभी,अखरोट का छिलका, हल्दी, दाडूं से प्राकृतिक रंग बनाने की विधियां बताई।
छरमा का फ़िक्सर के रूप में बढ़िया प्रयोग हो सकता है। उन्होंने ऊन की धुलाई, कताई के सही तरीकों की जानकारी भी दी। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकल -फ़ॉर -वॉकल की महत्व पर बोलते हुए कहा कि लाहौल घाटी में लोकल हैंडलूम की अपार संभावनाएं है महिलाओं की सशक्तिकरण व आत्मनिर्भरता पर उन्होंने कहा कि लोकल उत्पादों पर थोड़ा मूल्यवर्धन कर स्थानीय उत्पादों से  अधिक मुनाफा कमाकर सशक्त हो सकते है। मल्होत्रा ने महिलाओं को परंपरागत हस्तशिल्प को बढ़ावा देने पर भी बल देते हुए कहा कि घाटी में लोग ऊन को न बेचकर इससे बने मूल्यवर्धित उत्पाद बेचें। ज़िला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक नितिन शर्मा ने सरकार द्वारा हस्तशिल्प के लिए दी जाने वाली सहायता योजनाओं व कार्यशाला के बारे में बताया कि इसका उद्देश्य हैंडलूम उत्पादों के बारे  लोगों को मार्केटिंग व डिजाइनिंग की जानकारी देना है।  अब घाटी में पर्यटकों की आमद बढ़ रही है ऐसे में वे लोकल उत्पाद खरीदना चाहेगा, उस दिशा में काम करने के लिये दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है।

‘सेक्योर हिमालय परियोजना’ के तहत निफ्ट संस्थान कांगड़ा की दीपा चौहान, शिवानी सकलानी ने बताया कि हस्तशिल्प का व्यवसाय, पर्यावण एवं  पर्यटन का सहयोगी है। इससे कृषि एवं पशुपालन को भी बल मिलता है।
इस अवसर पर बीडीओ भानुप्रताप, डीएफएससी वृजेन्दर, मंगल सहित कई अधिकारी भी उपस्थित रहे। वहीं स्नो फ़ेस्टिवल स्नो फ़ेस्टिवल के 68 वें दिन में आज गांव बिलिंग में चार दिवसीय लामा -छोदपा का अंतिम दिन सम्पन्न हुआ जोकि 19 मार्च से शुरू हुआ था। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य आने वाले साल में सभी के सुख समृद्धि के लिए लामाओँ द्वारा चार दिन तक पूजा पाठ किया जाता है यह आयोजन स्थानीय लोगों द्वारा वर्षों से किया जा रहा है।
इस आयोजन में गांव के सभी लोग इकठ्ठा हो कर रोज खाना-पीना और पूजा- पाठ में सहयोग करते हैं।
मंगलवार से स्नो फ़ेस्टिवल के अंतर्गत दो दिवसीय होम स्टे प्रबन्धन पर कार्यशाला का शुभारम्भ केबिनेट मन्त्री डॉ  रामलाल मारकंडा के मुख्य आतिथ्य में किया जाएगा जिसमें पर्यटन विभाग के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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