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हिमाचलः पुष्प उत्पादन से बलविंद्र कमाते है लाखों रुपये; ऐसे बदली तकदीर

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हमीरपुर। सीमित संसाधनों और कम जमीन के बावजूद मेहनतकश किसान और बागवान अपने घर में ही वैज्ञानिक खेती से अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। ऐसे किसानों-बागवानों के लिए प्रदेश सरकार ने कृषि और उद्यान विभाग के माध्यम से कई अनुदान योजनाएं चलाई हैं। इन योजनाओं के तहत सब्सिडी प्राप्त करके कई किसान-बागवान अपनी थोड़ी सी जमीन पर भी वैज्ञानिक तरीकों से खेती करके न केवल लाखों रुपये कमा रहे हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी घर में ही रोजगार दे रहे हैं। जिला हमीरपुर के विकास खंड भोरंज के गांव नेली के बहादुर सिंह और उनके ग्रेजुएट बेटे बलविंद्र सिंह ने अपनी मेहनत, वैज्ञानिक सोच और विभागीय योजनाओं के बल पर कुछ ऐसा ही करके दिखाया है।

बलविंद्र ने ग्रेजुएशन के बाद नौकरी के बजाय अपनी पुश्तैनी जमीन पर ही वैज्ञानिक ढंग से खेती करने का संकल्प लिया

दरअसल, बहादुर सिंह का परिवार पीढिय़ों से पारंपरिक फसलों की खेती ही करता आ रहा था और पिछले कई वर्षों से उन्हें अपनी थोड़ी सी जमीन से नाममात्र आमदनी ही हो रही थी। मौसम चक्र में परिवर्तन के कारण तो स्थिति और भी खराब हो गई थी। कुछ वर्ष पहले बहादुर के बेटे बलविंद्र ने ग्रेजुएशन करने के बाद नौकरी के लिए जहां-तहां भटकने के बजाय अपनी पुश्तैनी जमीन पर ही वैज्ञानिक ढंग से खेती करने का संकल्प लिया। उन्होंने सबसे पहले सब्जियां लगानी शुरू कीं। इसी दौरान बलविंद्र को उद्यान विभाग की अनुदान योजनाओं की जानकारी मिली और विभाग के अधिकारियों की प्रेरणा से उन्होंने पारंपरिक फसलों से कुछ हटकर पुष्प उत्पादन में अपनी किस्मत आजमाने का निर्णय लिया। बलविंद्र सिंह की इस नई सोच और सपनों को अमलीजामा पहनाने में उद्यान विभाग की अनुदान योजनाओं ने बहुत बड़ी भूमिका अदा की। इन योजनाओं के तहत साढे 15 लाख रुपये से अधिक सब्सिडी प्राप्त करके बलविंद्र सिंह ने लगभग 1500 वर्गमीटर का पॉली हाउस लगाया तथा उसमें फूलों की खेती आरंभ की। उन्होंने विभाग के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेेकर पुष्प उत्पादन की बारीकियां सीखीं।

सीजन में ही 4 से 5 लाख रुपये तक के फूल बेच रहे

देखते ही देखते उनके खेतों और पॉलीहाउस में फूल खिलने लगे और अब वह अपने फूल सैकड़ों किलोमीटर दूर दिल्ली तथा अन्य बड़े शहरों तक भेज रहे है। बलविंद्र ने बताया कि वह एक सीजन में ही 4 से 5 लाख रुपये तक के फूल बेच रहे हैं। यही नहीं, वह पुष्प उत्पादन के माध्यम से गांव के अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे है। इस प्रकार पढ़े-लिखे और मेहनतकश बलविंद्र सिंह अन्य किसानों-बागवानों तथा युवाओं के लिए

एक प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। उधर, भोरंज की उद्यान विकास अधिकारी डॉ. ऊषा ने बताया कि विभाग की ओर से बागवानों एवं प्रगतिशील किसानों को तकनीकी जानकारी के साथ-साथ पॉलीहाउस पर 85 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जा रही है। पॉलीहाउस में पौधारोपण के लिए 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। इनके अलावा आधुनिक सिंचाई उपकरणों के लिए भी सब्सिडी का प्रावधान है। इन योजनाओं का लाभ आम किसानों तक पहुंचाने के लिए विभाग की ओर से शिविर आयोजित किए जाते हंैं। किसानों-बागवानों को इनका लाभ उठाना चाहिए।

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